गुरुवार, 4 दिसंबर 2008

naresh mehta par sakshatkar mila

हिन्दी साहित्य अकादमी भोपाल से प्रकाशित होने वाली पत्रिका साक्षात्कार का नरेश मेहता विशेषांक मिला । इसमें भुत साडी सामग्री है और बहुत काम की भी है । मेरा एक लेख शबरी पर इसमें छपने वाला था , सम्पादकजी ने क्यों नहीं छापा पता नहीं । खैर ; यह उनका सोच है । मैं उसका कई महीनों से इंतजार कर रहा था । गोयनका जी तो ग्रेट हैं । उनकी बातचीत काम आएगी ।

बुधवार, 3 दिसंबर 2008

समरलोक मे कहानी भादों की दोपहर

भोपाल से प्रकाशित होने वाली हिन्दी की बहुचर्चित पत्रिका समरलोक के ताजे अंक मे मेरी कहानी भादों की दोपहर छपी है । संपादक पदमश्री मेहरुन्निशा परवेज़ ने इसे रेखाचित्र विशेषांक मे स्थान दिया है । बहुत से दोस्तों और पाठकों की बधाइयां मिलीं , बहुत अच्छा लगा ।
दोस्तों , यह कहानी मेरे मन की कहानी है । कितने सालों से यह कहानी मेरे मन में चल रही थी । यह मेरे बचपन के अनुभव के आधार पर लिखी गई है । बस कहानी बनाने के लिए अंत को थोड़ा बदलना पड़ा है । एक मुस्लिम परिवार हमारे पड़ोस मे रहता था । उसमे दो लड़कियां थीं । बड़ी आपा की शादी हुई तब में कक्षा ६ मे पढता था । डिलिवरी के समय उनकी मौत हो गई । उस परिवार के उस समय के दुःख को मेने बहुत पास से देखा है । दो महीने बाद ही उनके दामाद हमारे घर आए और मेरी माँ से बोले की आप उनके घर हमारा संदेश पहुँचा दो की अगर बो लोग तैयार हैं तो हम छोटी लड़की से शादी करना चाहते हैं ।
यह सुनकर ही मेरी माँ उन पर गुस्सा हो गई और बोली - यह बात आप ख़ुद क्यों नहीं कहते । वेसे भी यह ग़लत है । वे बोले - नहीं आंटी जी , हम लोगों मे एसा चलता है ।
मेरी माँ ने संकोच करते हुए छोटी आपा के लिए उनकी अम्मी से बात कही और कहा की आप ऐसा बिल्कुल ना करना । उस पर बहुत हंगामा भी हुआ । बस उसी घटना की जो स्मर्तियाँ मेरे पास थीं उसी के उधेड़ बुन से यह कहानी बनी है । मुस्लिम घर के माहोल और उनकी उर्दू शब्दाबली तक पहुचने मे थोडा श्रम करना पड़ा , हलाकि में कक्षा ८ तक उर्दू भी पढ़ा हूँ । यह भी उसी माहोल की बात थी । मेहरुन्निशा जी ने इसे समरलोक मे स्थान देकर मेरे उस स्मृति को सामने आने अक मौका दिया है ।
आप भी अपनी राय मुझे भेजिए - मेरा कहानी संग्रह "अहम ब्रह्मास्मि " १९९९ मे प्रकाशित हुआ है उस के बारे मे बाद मे बात करेंगे । मेरा पता - shambarin@yahoo.com

बुधवार, 17 सितंबर 2008

हिन्दी का पहला पाठ

दोस्तों , आपका मेल सही समय पर नहीं मिल रहा है ।
खैर , इस बार की छूट आगे नहीं मिलेगी । आज के लिए केवल तीन बातों का अभ्यास करें ।
१ - आपकी राइटिंग साफ होनी चाहिए ।
२-अक्षर ठीक तरह से बनाये ।
३- भाषा शुद्ध रखने का प्रयास करें ।

गंजबासोदा में हिन्दी का सेमिनार

शासकीय संजय गाँधी स्मृति sनाताकोत्तर महाविद्यालय गंजबासोदा में हिन्दी का सेमिनार हुआ । नार्वे से साहित्यकार सुरेश चंद्र शुक्ला इसमे खास आए । लेकिन उनका आना केवल आयोजकों का ही शगल था ।यूं जी सी के पैसे उन पर लुटाये और हम सब बुद्धू लोट के घर को आए

शुक्रवार, 5 सितंबर 2008

डॉ राजेश श्रीवास्तव शम्बर

दोस्तों को सलाम ,
आज मैंने अपना वादा पूरा किया । आज १५ सितम्बर है और मैं आज ही अपनी क्लास शुरू भी कर रहा हूँ ।
लेकिन अभी चार ही दोस्तों ने इ मेल भेजा है । मैं चाहता था की पहले दिन से ही सब साथ चलें । आज पहले दिन में इतनी तयारी कर लें की आपका कंप्यूटर और ब्लॉग और मेल और महतवपूर्ण पते सरे दोस्तों के एकत्र कर लें । हिन्दी लिखने का अभ्यास करें । जेसा आपने बताया है की आप पढ़ तो लेते है लिख भी लेते हैं लेकिन उसमे गलती बहुत होती है तो उसके बारे मे भी बाते करेंगे । इसका रेस्पोंसे ४ बजे तक चाहिए आज की उपस्तिथि दीजिये फ़िर अगली बात करेंगे । मेरा पता एक बार फ़िर नोट कर लीजिये
www.shambarin@yahoo.com
shambar.blogspot.com

शनिवार, 17 मई 2008

१५ सितम्बर को नया ब्लॉग शुरू करने का कारण

दोस्तों नमस्ते
आज १५ सितम्बर है कल हिन्दी दिवस था आज मेरा जन्म दिन भी है बस केवल इसीलिए।
लेकिन एक वजह और भी है । मेरे सारे इ मेल दोस्त अपने ब्लॉग से कुछ न कुछ कर ही रहे हैं । लन्दन के मेरे दोस्त सतीश चाहते हैं हिन्दी सीखना । यानि वो जानते तो हैं लेकिन कुछ बारीकियाँ चाहते हैं। उन्होंने जो मुझे लिखा है उसमे अभी तीन बातें हैं
१ कविता ,शेर शायरी
२ हिन्दी व्याकरण
३ हिन्दी गाने
तो मेने सतीश जी की दोस्ती की खातिर उन्हें गाने और शेर शायरी की साईट पर जाने को कह दिया । लेकिन अब हिन्दी व्याकरण मेरऐ पल्ले पड़ गई है तो उसकऐ लिए हिन्दी क्लास अज से शुरू कर रहा हूँ ।

गुरुवार, 15 मई 2008