प्यारे निशु ,
आज तुम १६ साल के हो रहे हो । जन्मदिन पर बहुत बहुत शुभकामनाएं, मेरी और मम्मी की तरफ़ से । खूब मन लगाकर पढो और प्रगति करो । खुश रहो ।
----पापा
सोमवार, 8 दिसंबर 2008
शनिवार, 6 दिसंबर 2008
कुछ शेर बनाए
बहुत दिनों के बाद कुछ खाली समय मिला । इधर चुनाव थे ,तो उधर कालेज मे परीक्षा की तयारी चल रही है । कुछ भाग दौड़ , सबकुछ यूँ ही --- कुछ शेर बनाई हैं -गौर फरमाए
गफलत मे हमने चार दिन की जिंदगानी की
अपने ही आपसे ये कैसी बेईमानी की
बचपन से जिस समय का हमें इंतजार था
बे फिजूल हमने अपनी ये जवानी की
गफलत मे हमने चार दिन की जिंदगानी की
अपने ही आपसे ये कैसी बेईमानी की
बचपन से जिस समय का हमें इंतजार था
बे फिजूल हमने अपनी ये जवानी की
गुरुवार, 4 दिसंबर 2008
naresh mehta par sakshatkar mila
हिन्दी साहित्य अकादमी भोपाल से प्रकाशित होने वाली पत्रिका साक्षात्कार का नरेश मेहता विशेषांक मिला । इसमें भुत साडी सामग्री है और बहुत काम की भी है । मेरा एक लेख शबरी पर इसमें छपने वाला था , सम्पादकजी ने क्यों नहीं छापा पता नहीं । खैर ; यह उनका सोच है । मैं उसका कई महीनों से इंतजार कर रहा था । गोयनका जी तो ग्रेट हैं । उनकी बातचीत काम आएगी ।
बुधवार, 3 दिसंबर 2008
समरलोक मे कहानी भादों की दोपहर
भोपाल से प्रकाशित होने वाली हिन्दी की बहुचर्चित पत्रिका समरलोक के ताजे अंक मे मेरी कहानी भादों की दोपहर छपी है । संपादक पदमश्री मेहरुन्निशा परवेज़ ने इसे रेखाचित्र विशेषांक मे स्थान दिया है । बहुत से दोस्तों और पाठकों की बधाइयां मिलीं , बहुत अच्छा लगा ।
दोस्तों , यह कहानी मेरे मन की कहानी है । कितने सालों से यह कहानी मेरे मन में चल रही थी । यह मेरे बचपन के अनुभव के आधार पर लिखी गई है । बस कहानी बनाने के लिए अंत को थोड़ा बदलना पड़ा है । एक मुस्लिम परिवार हमारे पड़ोस मे रहता था । उसमे दो लड़कियां थीं । बड़ी आपा की शादी हुई तब में कक्षा ६ मे पढता था । डिलिवरी के समय उनकी मौत हो गई । उस परिवार के उस समय के दुःख को मेने बहुत पास से देखा है । दो महीने बाद ही उनके दामाद हमारे घर आए और मेरी माँ से बोले की आप उनके घर हमारा संदेश पहुँचा दो की अगर बो लोग तैयार हैं तो हम छोटी लड़की से शादी करना चाहते हैं ।
यह सुनकर ही मेरी माँ उन पर गुस्सा हो गई और बोली - यह बात आप ख़ुद क्यों नहीं कहते । वेसे भी यह ग़लत है । वे बोले - नहीं आंटी जी , हम लोगों मे एसा चलता है ।
मेरी माँ ने संकोच करते हुए छोटी आपा के लिए उनकी अम्मी से बात कही और कहा की आप ऐसा बिल्कुल ना करना । उस पर बहुत हंगामा भी हुआ । बस उसी घटना की जो स्मर्तियाँ मेरे पास थीं उसी के उधेड़ बुन से यह कहानी बनी है । मुस्लिम घर के माहोल और उनकी उर्दू शब्दाबली तक पहुचने मे थोडा श्रम करना पड़ा , हलाकि में कक्षा ८ तक उर्दू भी पढ़ा हूँ । यह भी उसी माहोल की बात थी । मेहरुन्निशा जी ने इसे समरलोक मे स्थान देकर मेरे उस स्मृति को सामने आने अक मौका दिया है ।
आप भी अपनी राय मुझे भेजिए - मेरा कहानी संग्रह "अहम ब्रह्मास्मि " १९९९ मे प्रकाशित हुआ है उस के बारे मे बाद मे बात करेंगे । मेरा पता - shambarin@yahoo.com
दोस्तों , यह कहानी मेरे मन की कहानी है । कितने सालों से यह कहानी मेरे मन में चल रही थी । यह मेरे बचपन के अनुभव के आधार पर लिखी गई है । बस कहानी बनाने के लिए अंत को थोड़ा बदलना पड़ा है । एक मुस्लिम परिवार हमारे पड़ोस मे रहता था । उसमे दो लड़कियां थीं । बड़ी आपा की शादी हुई तब में कक्षा ६ मे पढता था । डिलिवरी के समय उनकी मौत हो गई । उस परिवार के उस समय के दुःख को मेने बहुत पास से देखा है । दो महीने बाद ही उनके दामाद हमारे घर आए और मेरी माँ से बोले की आप उनके घर हमारा संदेश पहुँचा दो की अगर बो लोग तैयार हैं तो हम छोटी लड़की से शादी करना चाहते हैं ।
यह सुनकर ही मेरी माँ उन पर गुस्सा हो गई और बोली - यह बात आप ख़ुद क्यों नहीं कहते । वेसे भी यह ग़लत है । वे बोले - नहीं आंटी जी , हम लोगों मे एसा चलता है ।
मेरी माँ ने संकोच करते हुए छोटी आपा के लिए उनकी अम्मी से बात कही और कहा की आप ऐसा बिल्कुल ना करना । उस पर बहुत हंगामा भी हुआ । बस उसी घटना की जो स्मर्तियाँ मेरे पास थीं उसी के उधेड़ बुन से यह कहानी बनी है । मुस्लिम घर के माहोल और उनकी उर्दू शब्दाबली तक पहुचने मे थोडा श्रम करना पड़ा , हलाकि में कक्षा ८ तक उर्दू भी पढ़ा हूँ । यह भी उसी माहोल की बात थी । मेहरुन्निशा जी ने इसे समरलोक मे स्थान देकर मेरे उस स्मृति को सामने आने अक मौका दिया है ।
आप भी अपनी राय मुझे भेजिए - मेरा कहानी संग्रह "अहम ब्रह्मास्मि " १९९९ मे प्रकाशित हुआ है उस के बारे मे बाद मे बात करेंगे । मेरा पता - shambarin@yahoo.com
बुधवार, 17 सितंबर 2008
हिन्दी का पहला पाठ
दोस्तों , आपका मेल सही समय पर नहीं मिल रहा है ।
खैर , इस बार की छूट आगे नहीं मिलेगी । आज के लिए केवल तीन बातों का अभ्यास करें ।
१ - आपकी राइटिंग साफ होनी चाहिए ।
२-अक्षर ठीक तरह से बनाये ।
३- भाषा शुद्ध रखने का प्रयास करें ।
खैर , इस बार की छूट आगे नहीं मिलेगी । आज के लिए केवल तीन बातों का अभ्यास करें ।
१ - आपकी राइटिंग साफ होनी चाहिए ।
२-अक्षर ठीक तरह से बनाये ।
३- भाषा शुद्ध रखने का प्रयास करें ।
गंजबासोदा में हिन्दी का सेमिनार
शासकीय संजय गाँधी स्मृति sनाताकोत्तर महाविद्यालय गंजबासोदा में हिन्दी का सेमिनार हुआ । नार्वे से साहित्यकार सुरेश चंद्र शुक्ला इसमे खास आए । लेकिन उनका आना केवल आयोजकों का ही शगल था ।यूं जी सी के पैसे उन पर लुटाये और हम सब बुद्धू लोट के घर को आए
शुक्रवार, 5 सितंबर 2008
डॉ राजेश श्रीवास्तव शम्बर
दोस्तों को सलाम ,
आज मैंने अपना वादा पूरा किया । आज १५ सितम्बर है और मैं आज ही अपनी क्लास शुरू भी कर रहा हूँ ।
लेकिन अभी चार ही दोस्तों ने इ मेल भेजा है । मैं चाहता था की पहले दिन से ही सब साथ चलें । आज पहले दिन में इतनी तयारी कर लें की आपका कंप्यूटर और ब्लॉग और मेल और महतवपूर्ण पते सरे दोस्तों के एकत्र कर लें । हिन्दी लिखने का अभ्यास करें । जेसा आपने बताया है की आप पढ़ तो लेते है लिख भी लेते हैं लेकिन उसमे गलती बहुत होती है तो उसके बारे मे भी बाते करेंगे । इसका रेस्पोंसे ४ बजे तक चाहिए आज की उपस्तिथि दीजिये फ़िर अगली बात करेंगे । मेरा पता एक बार फ़िर नोट कर लीजिये
www.shambarin@yahoo.com
shambar.blogspot.com
आज मैंने अपना वादा पूरा किया । आज १५ सितम्बर है और मैं आज ही अपनी क्लास शुरू भी कर रहा हूँ ।
लेकिन अभी चार ही दोस्तों ने इ मेल भेजा है । मैं चाहता था की पहले दिन से ही सब साथ चलें । आज पहले दिन में इतनी तयारी कर लें की आपका कंप्यूटर और ब्लॉग और मेल और महतवपूर्ण पते सरे दोस्तों के एकत्र कर लें । हिन्दी लिखने का अभ्यास करें । जेसा आपने बताया है की आप पढ़ तो लेते है लिख भी लेते हैं लेकिन उसमे गलती बहुत होती है तो उसके बारे मे भी बाते करेंगे । इसका रेस्पोंसे ४ बजे तक चाहिए आज की उपस्तिथि दीजिये फ़िर अगली बात करेंगे । मेरा पता एक बार फ़िर नोट कर लीजिये
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